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चीन की भारत को लुभाने की कोशिश

अमेरिका और ईयू के चीन के खिलाफ अभियान से दूर रहने की सलाह

चीन नहीं चाहता कि भारत कोविड-19 की वैज्ञानिक जांच म में  अमेरिका का साथ दे । चीन की सरकार इस बात से इंकार कर रही है कि यूरोपीय यूनियन  के प्रस्ताव का भारत का समर्थन करना चीन के खिलाफ जाना है ।  चीन के अधिकारियों का कहना है कि खुद उनका देश कोरोना वायरस के प्रकट होने और इसके खतरनाक असर का वैज्ञानिक अध्ययन कराने को तैयार है।

चीन के अखबार  ग्लोबल टाइम्स लिखता है पश्चिम के मीडिया ने यह भ्रम फैलाने की यह कोशिश है कि भारत  यूरोपीय यूनियन के प्रस्ताव का समर्थन कर चीन के खिलाफ बन रहे गठजोड़ में शामिल हो गया है । चीनी अखबार ने दावा किया है कि भारत का यूरोपीय यूनियन को समर्थन देना चीन पर कोई दबाव नहीं पैदा करेगा।  क्योंकि दुनिया के तमाम वैज्ञानिक कोरोना वायरस के  संदर्भ में वुहान लैब  के किसी भी षड्यंत्र को खारिज कर चुके हैं। ग्लोबल टाइम्स चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी का अखबार है । यह माना जाता है कि इस अखबार के विचार चीन की सरकार के विचार होते हैं ।

चीन के इस अखबार का कहना है की शी जिनपिंग की सरकार  किसी भी वैज्ञानिक  जांच से डर नहीं रही है, बल्कि चीन को सिर्फ आपत्ति इस बात पर है कि कुछ देश कोरोना  को चीन का षड्यंत्र बताने के लिए झूठा प्रचार कर रहे हैं ।

चीन ने एक तरह से भारत के प्रति आभार जताया है कि  मोदी सरकार ने अमेरिका  के सुर में सुर मिला कर कोरोना  के लिए चीन को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

चीनी सरकार का कहना है कि वह अमेरिका की तरह कोरोना वायरस की आड़ में किसी देश पर आर्थिक प्रतिबंध नहीं लगाएगी।  हालांकि सच्चाई ऐसी नहीं है । हाल ही में आस्ट्रेलिया द्वारा चीन के खिलाफ कोरोना षडयंत्र की जांच की मांग उठाने पर शी जिनपिंग की सरकार ने न सिर्फ वहां से बीफ इंपोर्ट को रोक दिया है , बल्कि कई अन्य चीजों पर भी भारी ड्यूटी लगा दी है । लेकिन ग्लोबल टाइम्स ने यह दावा किया है कि ऑस्ट्रेलिया के ऊपर चीन कोई आर्थिक प्रतिबंध नहीं लगाएगा । उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति  ट्रंप लगातार चीन के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं ।

लेकिन चीन इस बात से भी इनकार भी नहीं कर रहा कर रहा कि मौजूदा समय में परिस्थितियां तेजी से बदल रही है, और विभिन्न  देशों के बीच व्यापारिक संबंध भी नए धरातल पर बनाए जा रहे हैं।  इन खबरों पर कि अमेरिका की बहुत सारी कंपनियां भारत जा रही हैं , चीनी अखबार लिखता है कि यह सब अमेरिकीे सरकार के वश में नहीं है । चीन ने भारत को एक तरह से मशविरा दिया है कि वह इस वक्त पर बीजिंग  के खिलाफ अपना मत प्रकट करने के बजाए स्वतंत्र  निर्णय करें ।

ग्लोबल टाइम्स का कहना है भारत और चीन एशिया के 2 सबसे बड़े देश हैं और  दोनों देशों की भलाई इसी में है कि  आर्थिक क्षेत्र में आपसी सहमति के आधार पर निर्णय करें। ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय मीडिया द्वारा चीन के खिलाफ लगातार खबरें प्रकाशित करने को अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने का फ॔डा बताया है

ग्लोबल टाइम्स का कहना है भारतीय मीडिया में चीन के खिलाफ आ रही खबरें मोदी सरकार  के  दृष्टिकोण का का प्रतिनिधित्व नहीं करती। चीन ने भारत को सलाह दी है कि  जिस तरह कोरोना वायरस फैल रहा है और वहां की आर्थिक व्यवस्था भी दवाब में है, ऐसे में बेहतर है कि भारत चीन के साथ दोस्ताना संबंध रखें । चीन ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आत्मनिर्भरता की नीति घोषित  करने पर भी टिप्पणी की है । चीन का कहना है कि  आप निर्भर  बनने के क्रम में भारत विश्व के अन्य देशों के लिए रास्ता बंद नहीं करेगा और अपने देश के उद्योगों को संरक्षित करने के लिए अन्य देशों पर कोई भारी ड्यूटी  नहीं लगाएगा।

BIKRAM UPADHYAY
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