Health

बीएचयू कोरोना के इलाज की खोज में

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वैज्ञानिक कोरोना संक्रमण का उपचार जोर शोर से खोजने में लगे हुए हैं । बीएचयू के वैज्ञानिकों ने डेंगू में कारगर रहे फीफाट्रोल का परीक्षण कोरोना पर करने का फैसला लिया है। इसके लिए केंद्रीय आयुष मंत्रालय की ओर से गठित टास्क फोर्स में आवेदन भी किया जा चुका है।


टास्क फोर्स के सदस्य व आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फीफाट्रोल का कोरोना के इलाज के लिए अध्ययन के लिए एमिल फॉर्मास्युटिकल व बीएचयू की ओर आवेदन प्राप्त हुआ है। जल्द ही इसकी मंजूरी दी जा सकती है।
भारत सरकार की फॉर्माकोपिया समिति के पूर्व सदस्य व बीएचयू के विभागाध्यक्ष डॉ. केएन द्विवेदी ने बताया कि अभी तक कोरोना वायरस पर आयुर्वेद का ट्रायल दुनिया में कहीं नहीं हुआ है। पहली बार भारत यह अनूठा प्रयोग करने जा रहा है।

डॉ. द्विवेदी ने बताया कि फीफाट्रोल डेंगू में काफी कारगर है। इसके जरिए मरीजों में तीन दिन के भीतर प्लेटलेट्स दोगुनी होने तक के परिणाम मिल चुके हैं। इसके अलावा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल भी इस पर अध्ययन कर चुका है जिसमें इस दवा को आयुर्वेदिक एंटीबॉयोटिक के रुप में पहचान दी है। बैक्टीरिया संक्रमण के खिलाफ यह कारगर है। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बूस्ट करता है।


सरकार से मंजूरी के बाद कोरोना संक्रमित मरीजों के दो समूह इसका परीक्षण किया जाएगा । इससे पता चल सकता ता है कि यह दवा कोरोना में कितनी कारगर हो सकती है? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस अध्ययन को ले जाने के लिए ज्यादा मरीजों पर ट्रायल किया जा सकता है।
आगामी दिनों में उत्तर प्रदेश के कुछ कोविड अस्पतालों में इसका ट्रायल हो सकता है जहां कोरोना संक्रमित मरीजों का उपचार चल रहा है। दो में से एक समूह को अन्य दवाओं का सेवन कराया जाएगा। जबकि दूसरे समूह को अन्य दवाओं के साथ फीफाट्रोल का सेवन कराने के साथ परिणामों पर अध्ययन होगा।


डॉ. द्विवेदी ने बताया कि एमिल फॉर्मास्युटिकल की फीफाट्रोल 13 जड़ी बूटियों से तैयार एक एंटी माइकोबियल औषधीय फार्मूला है जिसमें शामिल पांच प्रमुख बूटियों में सुदर्शन वटी, संजीवनी वटी, गोदांती भस्म, त्रिपुवन कीर्ति रस और मत्युंजय रस शामिल हैं। जबकि आठ औषधों के अंश मिलाए गए हैं जिनमें तुलसी, कुटकी, चिरयात्रा, मोथा गिलोय, दारुहल्दी, करंज व अप्पामार्ग शामिल हैं।

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